क्या टेरीज़ा मे ब्रिटेन की एंगेला मर्केल हैं?

Jul 14, 2016

जर्मनी के मीडिया ने ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के आगमन का “इंग्लैंड की एंगेला मर्केल”, “मे ब्रिटेन की मर्केल हैं”, या फिर “ब्रितानी मर्केल” जैसी सुर्खियों से स्वागत किया है.

क्या ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री और यूरोप की सबसे शक्तिशाली नेता में कोई समानता है?

एंगेला मर्केल के चांसलर रहे गेरहार्ड श्रोएडर के बालों या कपड़ों की, उनके समकालीन टोनी ब्लेयर से किसी ने कभी तुलना नहीं की.

लेकिन क्या इन दोनों नेताओं की तुलना इसलिए हो रही है कि ये दोनों महिलाएं हैं?

दोनों महिलाओं ने पुरुष वर्चस्व वाले राजनीतिक दलों में अपनी जगह बनाई है.

दोनों को अपने पहनावे और लुक को लेकर मीडिया की नज़रों का सामना करना पड़ा है. जैसे कि टेरीज़ा में के चीता प्रिंट वाले जूते और एंगेला मर्केल के बालों की स्टाइल.

लेकिन दोनों ही नेताओं में पहनावे, बालों के स्टाइल और लुक को छोड़कर भी कई बातें ऐसी हैं जिनकी चर्चा की जा रही है.

टेरीज़ा मे और एंगेला मर्केल दोनों ही प्रोटेस्टैंट पादरी पिता की संतान हैं.

एंगेला मर्केल का बचपन कम्युनिस्ट पूर्वी जर्मनी के प्रोटेस्टैंट परिवार में बीता और इसने उन्हें ‘बाहरी’ बना दिया. सत्ताधारी कम्युनिस्टों ने ईसाइयत को हमेशा संदेह की नज़रों से देखा. बर्लिन की दीवार को गिराने में चर्च की अहम भूमिका रही थी.

जबकि ब्रिटेन में ऐंग्लिकन पादरी का परिवार पारंपरिक रूप से सत्ता का हिस्सा माना जाता रहा है. लेकिन दोनों नेताओं की धार्मिक पृष्ठभूमि क्या उनकी नीतियों को प्रभावित करती है?

चांसलर मर्केल ने शरणार्थियों के स्वागत के फैसले का समर्थन किया है और इसे नैतिक आधार पर ज़रूरी करार दिया है.

धार्मिक उसूलों के आधार पर बनी उनकी क्रिस्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी न केवल रूढ़िवादी है बल्कि समाज के वृहत्तर हित को ज़रूरी मानती है.

थेरेसा मे के सामाजिक सुधार और असमानता खत्म करने को लेकर दिए गए हाल के बयानों से संकेत मिलता है कि वो भी जर्मन शैली की क्रिस्चियन डेमोक्रैट ज़्यादा हो सकती हैं, न कि मार्गरेट थैचर की “समाज जैसी कोई चीज़ नहीं” जैसी सोच रखने वाली टोरी नेता.

यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलगाव यानी ब्रेक्सिट को लेकर ईयू और लंदन के बीच जो बातचीत होगी उसमें एंगेला मर्केल के साथ टेरीज़ा मे मुख्य वार्ताकार की भूमिका में होंगी.

जर्मन चांसलर हमेशा कहती हैं कि वो जो कुछ कह रही हैं वो सभी 27 यूरोपीय संघ सदस्यों का फैसला है. लेकिन असल में उनकी आवाज़ सबसे ज़्यादा मायने रखती है.

एंगेला मर्केल ईयू में सबसे ज्यादा समय तक नेतृत्व देने वाली नेता हैं और यूरोप की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था वाले देश की नेता भी.

ब्रेक्सिट को लेकर होनेवाली बातचीत को यूरोपीय आयोग नहीं बल्कि सदस्य देश आगे बढ़ाएंगे. इसका मतलब है कि ब्रितानी और जर्मन नेताओं के बीच के रिश्ते काफ़ी मायने रखेंगे.

ब्रिटेन के ईयू छोड़ने के फैसले से जर्मनी दुखी हुआ था. जर्मनी में इसे भावनात्मक संबंध विच्छेद के तौर पर देखा जा रहा है. लेकिन अब ज्यादातर जर्मनवासियों की प्राथमिकता ये है कि ब्रेक्सिट की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाए और कोई आर्थिक नुकसान न हो.

अभी तक जर्मन राजनेता टेरीज़ा मे को लेकर अपने वक्तव्यों में सावधानी बरत रहे हैं. शायद इसकी वजह ये है कि ब्रिटेन की राजनीति अनिश्चयपूर्ण हो गई है.

चांसलर मर्केल ने ब्रिटेन में अपनी समकक्ष के बारे मे यही कहा है कि उनकी पहली ज़िम्मेदारी ये साफ़ करने की होगी कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ के साथ भविष्य में कैसे संबंध चाहता है. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 50 को लागू करने में देर नहीं होनी चाहिए. इसके बाद ही ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने की दो साल की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी.

और यही दोनों नेताओं के बीच मतभेदों की शुरूआत की वजह भी हो सकती है क्योंकि टेरीज़ा मे अनुच्छेद 50 की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही बातचीत की प्रक्रिया शुरू करना चाहेंगी.

हालांकि दोनों नेताओं की छवि अच्छे वार्ताकार की रही है, जो समस्याओं के समाधान के लिए विचारधारा छोड़कर और परिस्थिति के अनुसार फ़ैसले ले सकती हैं.

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