…वीरू, शोले और सुनील गावस्कर

Jul 10, 2016

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और बॉलीवुड की ऑल टाइम ग्रेट फिल्म ‘शोले’ के बीच क्या कोई समानता है?

इस सवाल का जवाब अगर जानना है तो इसे टीम इंडिया के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग के रविवार को किए ट्वीट में तलाशिए.

भारतीय क्रिकेट के सबसे कामयाब टेस्ट ओपनर गावस्कर को सहवाग ने बेहद दिलचस्प अंदाज़ में जन्मदिन की बधाई दी.

सहवाग ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “अगर क्रिकेट कोई फिल्म हो तो गावस्कर शोले हैं.”

साल 1975 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘शोले’ कई मायनों में मिथक मानी जाती है. इस फिल्म के किरदार और उनके डॉयलॉग बरसों तक लोगों के दिलो-दिमाग पर छाए रहे. ‘शोले’ की कामयाबी 1975 के बाद रिलीज़ हुई हर बड़ी फ़िल्म के लिए बैंच मार्क रही.

सहवाग का ट्वीट जाहिर करता है कि भारतीय क्रिकेट में ऐसा ही मुक़ाम लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर सुनील गावस्कर का है.

सहवाग ने लिखा, “गावस्कर ने बिना हेलमेट के जो किया, वो इन दिनों लोगों के लिए तमाम उपकरणों के साथ भी करना मुश्किल है.”

सहवाग ने जो कहा उसकी गवाही गावस्कर के रिकॉर्ड भी देते हैं. 125 टेस्ट मैचों में 51.12 के औसत से 10,122 रन और 34 शतक गावस्कर के खाते में दर्ज हैं.

इनमें से 13 शतक और 2749 रन वेस्ट इंडीज की उस टीम के ख़िलाफ़ गावस्कर के बल्ले से निकले, जिसकी पेस बैटरी से दुनिया का हर बल्लेबाज़ ख़ौफ खाता था. वेस्ट इंडीज के ख़िलाफ़ गावस्कर ने 65.45 के ज़बरदस्त औसत के साथ रन बनाए.

गावस्कर टेस्ट क्रिकेट में दस हज़ार रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ बने और बरसों तक टेस्ट में सबसे ज़्यादा शतक जमाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज़ रहा.

गावस्कर के टेस्ट शतकों का रिकॉर्ड तोड़ने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से लेकर ‘रनों की दीवार’ कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ और ‘विस्फोटक’ सहवाग तक ‘लिटिल मास्टर’ को अपनी प्रेरणा बताते रहे हैं.

तेंदुलकर ने गावस्कर को जन्मदिन की बधाई देते हुए ट्विटर पर लिखा है, “तमाम सालों तक मुझे प्रेरित करने के लिए शुक्रिया.”

अपने बाद की कई पीढ़ियों के बल्लेबाजों को प्रेरित करने वाले गावस्कर ने भारतीय टीम को जीतने की कला भी सिखाई. महेंद्र सिंह धोनी, सौरव गांगुली और मोहम्मद अज़हरुद्दीन के पहले बतौर कप्तान भारत के लिए सबसे ज्यादा टेस्ट मैच जीतने का रिकॉर्ड गावस्कर के ही नाम था.

सुनील गावस्कर ने 47 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की और 9 में उसे जीत दिलाई. गावस्कर की कप्तानी में भारत ने सिर्फ 8 मैच गंवाए.

गावस्कर ने अपने बल्ले के ज़ोर से न सिर्फ दुनिया के भर के गेंदबाजों को घुटने पर आने के लिए मजबूर किया बल्कि भारतीय टीम की छवि भी बदली और ये बदलाव कितना मिथकीय है इसका अंदाज़ा गावस्कर और ‘शोले’ की तुलना से लगाया जा सकता है.

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