ब्रिटेन: टाटा स्टील की इकाई की बिक्री ‘खटाई में’

Jun 30, 2016

भारतीय कंपनी टाटा स्टील की ब्रिटेन इकाई की बिक्री योजना के खटाई में पड़ने की आशंका है.

यूरोपीय संघ से अलग होने के ब्रिटेन के फ़ैसले के बाद बनी नई परिस्थितियों में कंपनी की ब्रिटेन इकाई के भविष्य पर संकट खड़े हो गए हैं.

ब्रिटेन की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता के कारण टाटा स्टील के ब्रिटेन स्थित स्टील प्लांट्स की बिक्री के प्रयास पटरी से उतर सकते हैं.

कंपनी की चिंता का मुख़्य कारण पेंशन स्कीम में प्रस्तावित बदलाव हैं.

सरकार का कहना है कि पेंशन स्कीम पर कंपनी के साथ चल रही बातचीत समाप्त हो चुकी है और अब वह नियत समय में फैसला करेगी.

टाटा स्टील ने मार्च में घोषणा की थी कि वह ब्रिटेन स्थित अपना कारोबार बेचने की योजना बना रहा है.

अनुमान है कि इससे 11,000 कर्मचारियों की नौकरियां ख़तरे में पड़ सकती हैं.

कंपनी ने तब इस बात की पु्ष्टि की थी कि वह ब्रिटेन के स्टील कारोबार की आंशिक या पूर्ण बिक्री कर सकती है.

लेकिन ख़रीददार स्टील कर्मचारियों की लंबी-चौड़ी पेंशन स्कीम के कारण ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिख़ा रहे हैं.

ख़रीददार स्टील वर्क्स पेंशन स्कीम का बोझ उठाने से हिचकिचा रहे हैं जिसके सदस्यों की संख्या 130,000 है.

कामगारों के परिवारवालों के लाखों लोग इस स्कीम के भरोसे हैं. यह स्कीम भी लगभग 70 करोड़ पाउंड के घाटे में चल रही है.

मई में ब्रिटेन के व्यापार मंत्री साजिद जाविद ने पेंशन के मुद्दे को हल करने के लिए विकल्प तलाशने पर बातचीत शुरू की थी.

लेकिन अब कंपनी को इस बात की चिंता सताने लगी है कि अक्तूबर में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के इस्तीफ़े के बाद पद के लिए दावेदारी का दौड़ शुरू हो गई है.

इस राजनीतिक अस्थिरता के कारण यह प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है.

कंपनी के करीबी सूत्रों का कहना है, “साफ़ है कि यह दौर ब्रिटेन की राजनीति में अस्थिरता का दौर है.”

सूत्रों के अनुसार, “कंपनी को उम्मीद है कि ब्रिटेन के लाखों कामगार जो कंपनी की पेंशन पर निर्भर करते हैं, उन्हें राजनीतिक नेतृत्व से जुड़ी अस्थिर माहौल के हवाले नहीं कर दिया जाएगा.”

पेंशन एवं कार्य विभाग के सचिव स्टीफ़न क्रेब ने बुधवार को कंज़रवेटिव पार्टी का नेतृत्व करने की अपनी इच्छा व्यक्त की है.

उनकी उम्मीदवारी में साजिद जाविद उनका साथ दे रहे हैं. उन्हें क्रेब के जीतने की स्थिति में चांसलर बनने की उम्मीद है. जाविद की निगरानी में स्टील उद्योग के संकट को हल करने के लिए कई गंभीर प्रयास किए जा रहे थे.

इसी कारण चिंता जताई जा रही है कि कहीं अब नेतृत्व की दौड़ पर ध्यान केंद्रित करते समय, पेंशन के इस मसले को ठंडे बस्ते में न डाल दिया जाए.

स्कीम पर बातचीत का सिलसिला 23 जून को बंद हो गया था. इस पर सरकार की प्रतिक्रिया चार हफ्तों में आई है लेकिन उसके बाद संसद ब्रेक पर चली जाएगी.

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