ब्रिटेन के साथ कठोर व्यवहार न होः मैर्कल

Jun 26, 2016

ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के फ़ैसले के बाद चर्चा इस बात पर हो रही है कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग होने की प्रक्रिया कब और कैसे शुरू करे.

यूरोपीय संघ का कहना है कि बातचीत शुरू होने से पहले ब्रिटेन को इस संबंध में अलग होने का प्रस्ताव देना होगा.

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्कल ने कहा है कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने की वार्ता में यूरोप को ब्रिटेन के प्रति कठोर व्यवहार करने की ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया की बातचीत की प्राथमिकता अन्य देशों को यूरोपीय संघ छोड़ने से रोकना नहीं होनी चाहिए.

मैर्कल ने कहा है,”ईमानदारी से कहूं तो इसमें लंबा समय नहीं लगना चाहिए, यह महत्वपूर्ण है. लेकिन मैं कम समय में इसे निबटाने पर ज़ोर नहीं दूंगी. महत्वपूर्ण बात ये है कि अभी ग्रेट ब्रिटेन ने अलग होने का प्रस्ताव नहीं पेश किया है और जब तक ऐसा नहीं किया जाता तब तक समझौता पूरा नहीं होता. तब तक ग्रेट ब्रिटेन यूरोपीय संघ का पूर्ण सदस्य है और उसके पास सभी अधिकार और ज़िम्मेदारियां हैं. मैंने इस बारे में ब्रितानी प्रधानमंत्री से भी बात की है और उनकी भी राय यही है.”

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हालांकि चांसलर अंगेला मैर्कल से पहले जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रांक वॉल्टर श्टाइनमायर ने यूरोपीय संघ के संस्थापक देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक के बाद कहा था अब ब्रिटेन को देरी नहीं करनी चाहिए.

इससे पहले यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष ज्यां क्लां युंकर ने कहा था कि अब ब्रिटेन के अलग होने की प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाना चाहिए और कैमरन के पद छोड़ने का इंतज़ार करना तर्क़संगत नहीं है.

यूरोपीय संघ में चिंता है कि ब्रिटेन के बाद अन्य देश भी संघ से अलग होने की मांग कर सकते हैं.

उधर अमरीकी राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि ब्रिटेन के फ़ैसले के बाद यूरोपीय संघ अखंड नहीं बना रह सकेगा

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इस बारे में पूछे गए पत्रकारों के सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा,” मुझे लगता है कि अब यूरोपीय संघ को बहुत परेशानी होगी. बहुत से और लोग भी ब्रिटेन के नक़्शेक़दम पर चलेंगे. आप भी ये मानेंगे कि मैंने ही कहा था कि ऐसा होगा. मैं मानता हूँ कि आप अन्य लोगों को भी ऐसा करते हुए देखेंगे.

डोनल्ड ट्रंप ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की ब्रिटेन के अलग होने के फ़ैसले के बाद दी गई प्रतिक्रिया की आलोचना भी की.

ट्रंप ने कहा कि ओबामा ने पहले कुछ और कहा था और अब कुछ और कह रहे हैं. मुझे लगता है कि ये ब्रिटेन के लिए बुरा संकेत है.

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इन सब के बीच ब्रिटेन में जनमत संग्रह के फ़ैसले के बाद व्यापक प्रतिक्रिया हो रही है. लोगों ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है.

इस मुद्दे पर एक और जनमत संग्रह कराने की मांग करने वाली ऑनलाइन याचिका को अब तक 25 लाख से ज़्यादा लोगों का समर्थन मिल चुका है.

चूंकि इसे एक लाख से ज़्यादा लोगों का समर्थन मिल चुका है इसलिए संसद में इस पर चर्चा भी होगी.

हालांकि ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन पहले कह चुके हैं कि इस मुद्दे पर दूसरा जनमतसंग्रह नहीं होगा.

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