पलायन: कैराना एक, कहानियां अनेक…

Jun 13, 2016

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू का कहना है कि उत्तर प्रदेश की सरकार ने अभी तक केंद्र को यह नहीं बताया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना का मामला आख़िर क्या है.

दरअसल कई दिनों से मीडिया में उत्तर प्रदेश के कैराना को लेकर अलग अलग तरह की खबरें चल रही हैं.

कुछ ख़बरों के मुताबिक वहां से कई हिंदू परिवारों ने पलायन किया है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों के मुताबिक ये बात सही नहीं है.

किरण रिजिजू ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए केंद्र की तरफ़ से उत्तर प्रदेश की सरकार को हर संभव मदद का वादा किया है.

दूसरी ओर केंद्रीय क़ानून मंत्री सदानंद गौड़ा का कहना है कि कैराना के हालात इतने गंभीर हैं कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए.

अख़बारों की बात करें तो अंग्रेज़ी के अख़बार कुछ कह रहे हैं जबकि हिंदी के अख़बार कुछ और ही कह रहे हैं.

समाचार चैनल ज़ी-न्यूज़ ने अपनी कि जो ‘हिन्दुओं के साथ कश्मीर में 1990 में हुआ था वो अब कैराना के हिन्दुओं के साथ हो रहा है’.

समाचार चैनल का दावा है कि कुल मिलाकर 346 हिन्दू परिवार, रंगदारी और गुंडागर्दी से तंग आकर अपने घर छोड़कर जा चुके हैं.

ज़ी न्यूज़ के मुताबिक इलाके के व्यापारियों की एक के बाद एक हत्याओं ने पूरे इलाक़े में बना दिया है.

अख़बार नयी दुनिया ने भी रिपोर्ट दी है, “कोई कुछ भी कहे, मगर सच यही है कि क़ौमी एकता के हामी रहे उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले के कैराना कस्बे की कीर्ति कलंकित हो चुकी है. रंगदारी, अपहरण, लूटपाट और हत्या की लगातार वारदातों ने अवाम का चैन छीन लिया है. पिछले करीब चार वर्षों में भय के मारे ढाई सौ से भी ज्यादा हिदू परिवारों ने यहां से पलायन कर लिया.”

अख़बार आगे लिखता है- “पलायन का यह सिलसिला ख़त्म नहीं हुआ है. हाकिम और हुक्मरानों से भरोसा उठा तो तमाम लोगों ने घर-बार छोड़ दिया. नतीजतन कई बस्तियां वीरान हो गईं. तमाम घरों पर ताले लटके हैं. अब भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने इस मुद्दे पर गृह मंत्रालय को पत्र लिखा तो सियासी प्याले में तूफान उठा. प्रशासन के .”

दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इलाक़े में बिगड़ती क़ानून व्यवस्था की वजह से ’40 मुस्‍लिम परिवार भी इलाक़े से पलायन कर चुके हैं.’

अख़बार ने भाजपा के सांसद हुकुम सिंह का बयान छापा है जिसमें दावा किया गया है कि पिछले पांच सालों में कैराना में हिन्दुओं की हो गई है.

लेकिन कुछ समाचार चैनलों ने ‘कैराना के सच’ की पड़ताल ख़ुद करने की कोशिश की है.

‘एबीपी न्यूज़’ के संवाददाता ने उन लोगों के घरों पर जाकर पलायन करने वालों का पता लगाने के क्रम में कुछ और ही पाया.

एबीपी न्यूज़ के मुताबिक- “हालांकि वैश्य समाज के लोगों का कहना है कि यहां व्यापारियों से रंगदारी मांगी जाती है. हाल के दिनों में तीन लोगों की हत्या भी हुई है, जिसके बाद से व्यापारी दहशत में हैं.”

समाचार चैनल की पड़ताल में कहा गया है- “दहशत और पलायन के दावों की पड़ताल के लिए जब हम सांसद की लिस्ट में 116 नंबर पर मौजूद प्रमोद जैन के घर पहुंचे तो मालूम चला कि प्रमोद अपनी पत्नी के साथ कैराना में ही रह रहे हैं. कैराना में पहले पान की दुकान चलाने वाले पवन जैन अब दिल्ली बस चुके हैं, लेकिन उनके भाई का कहना है कि इसके पीछे पलायन नहीं बल्कि रोज़गार वजह है. कैराना को करीब से जानने वाले बताते हैं कि अच्छा पैसा कमाने की चाहत में लोग बड़े कर रहे हैं.”

कैराना से हो रहे पलायन की ख़बरों को अंग्रेज़ी समाचार पत्रों और न्यूज़ पोर्टल्स ने बिकुल अलग तरीके से छापा है.

हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि सांसद हुकुम सिंह के लगाए गए आरोपों की अधिकारियों ने जब प्रारंभिक जांच की तो इन ‘दावों की हवा निकल गई.’

समाचार पत्र ने पुलिस अधिकारी अनिल कुमार झा के हवाले से कहा है कि पिछले आठ से दस सालों से कैराना से लोग बेहतर कमाई और नौकरी के लिए जाते रहे हैं.

समाचार पत्र में पुलिस के हवाले से यह भी कहा गया है कि 150 मुस्लिम परिवार भी जा चुके हैं.

अख़बार का कहना है कि भाजपा कैराना के मुद्दे को उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा के चुनावों को देखते हुए मतों के ध्रुवीकरण के लिए.

न्यूज़ पोर्टल ‘फर्स्ट-पोस्ट’ ने भी लिखा कि ‘भाजपा ने इलाहाबाद में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कैराना से हिन्दुओं के पलायन की बात जानबूझकर उठायी ताकि ध्रुवीकरण किया जा सके’.

न्यूज़ पोर्टल आगे लिखता है कि ऐसा लगता है कि कैराना की कहानी की जा रही है.

एक अन्य न्यूज़ पोर्टल ‘स्क्रॉल डॉट इन’ ने शामली ज़िला प्रशासन के हवाले से लिखा है कि भाजपा की दी गयी सूची में ‘चार लोग ऐसे हैं जो बीस साल पहले मर चुके हैं.’

पोर्टल ने प्रशासन की जाँच के हवाले से लिखा है कि जिन लोगों के पलायन के बारे में कहा गया है उनमें से 13 ने कभी कैराना नहीं छोड़ा और 68 ऐसे हैं जो कारोबार और गए हैं.

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