भारत अमरीका साझा बयान की 7 मुख्य बातें

Jun 08, 2016

मंगलवार को व्हाइट हाउस में अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरीका को धन्यवाद दिया कि उसने एनएसजी (न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप) में शामिल होने के लिए भारत का समर्थन किया है.

दोनों देशों के बीच ये तीसरी मुख्य द्विपक्षीय उच्चस्तरीय बातचीत थी. बातचीत के बाद दोनों पक्षों की ओर से संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया. आइए जानते हैं इस वक्तव्य की 7 मुख्य बातें.

1. बयान में पठानकोट, ब्रसल्स या काबुल में हुईं ‘आतंकी’ घटनाओं की निंदा की गई और इन्हें रोकने के लिए साथी देशों के साथ कोशिशों को दोगुना करने का संकल्प लिया गया ताकि “आतंकी घटनाओं के ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाए, चाहे वो दुनिया में कहीं भी हों.”

2. दोनों पक्षों ने चरमपंथी संगठनों जैसे अल कायदा, दाएश/आईएसआईएस, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तय्यबा, डी-कंपनी और उनसे जुड़े गुटों के खिलाफ़ सहयोग मज़बूत करने की बात की. साथ ही पाकिस्तान से आह्वान किया गया कि वो वर्ष 2008 में मुंबई और वर्ष 2016 में पठानकोट आतंकी हमलों के दोषियों को सज़ा दे.

3. बयान में दोनों नेताओं ने एमटीसीआर (मिसाइल टेक्नॉलॉजी कंट्रोल रिजीम) में भारत के शामिल होने की बात कही. साथ ही राष्ट्रपति ओबामा ने एनएसजी में भारत की ओर से दायर अर्जी का स्वागत किया. वक्तव्य के मुताबिक राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि “भारत (एनएसजी की) सदस्यता के लिए तैयार है.” वक्तव्य में एनएसजी सदस्यों से कहा गया कि वो अगले महीने होने वाली बैठक में भारतीय अर्ज़ी का समर्थन करें. अमरीका ने ऑस्ट्रेलिया ग्रुप और ‘वॉसेनार अरेंजमेंट’ में भारतीय सदस्यता पर समर्थन दोहराया.

4. बयान के अनुसार “सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम और मज़बूत रक्षा उद्योगों के समर्थन में” अमरीका भारत को तकनीक और सामान निर्यात उपलब्ध करवाता रहेगा. वक्तव्य में संयुक्त रूप से रक्षा उपक्रम लगाने की बात कही गई.

5. दोनो नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की स्थाई सदस्यता पर समर्थन की बात की.

6. अमरीका और भारत ने क्लीन एनर्जी फाइनेंस के गठन की घोषणा की. माना जा रहा है कि इस कोशिश से 40 करोड़ डॉलर इकट्ठा करने में मदद मिलेगी जिससे वर्ष 2020 तक 10 लाख लोगों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने में मदद मिलेगी.

7. वक्तव्य में दोनों नेताओं ने एक दूसरे के यहां ज़्यादा पेशेवर लोगों, मुसाफ़िरों, निवेशकों, छात्रों और व्यापारियों की आवाजाही मुहैया करने की बात की ताकि दोनों देशों के लोगों के बीच आर्थिक और तकनीकी भागीदारी को बढ़ाया जा सके.

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