जाट आरक्षण की मांग को लेकर फिर से आंदोलन

Jun 05, 2016

हरियाणा में एक बार फिर जाट आरक्षण आंदोलन भड़क सकता है.

रोहतक से 20 किलोमीटर दूर जसइया गांव के राष्ट्रीय राजमार्ग 71 पर दोपहर तक कथिततौर पर बिना हथियार के लगभग 2000 लोग एकत्रित हो चुके हैं.

यह बता दें कि पूरे राज्य में धारा 144 लागू है जिसके अनुसार एक जगह पर पांच से अधिक लोगों को एकत्रित होने की इजाज़त नहीं है.

किसी भी आरोप से बचने तथा एकत्रित हुए लोगों पर बारीकी से नज़र रखने के लिए पुलिस ड्रोन से वीडियो रिकॉर्डिंग कर रही है.

ऑल इंडिया जाट आरक्षण संघर्ष समिति और जाट नेताओं द्वारा रविवार से आंदोलन शुरू करने की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने पिछले जाट आंदोलन से सबक़ लेते हुए चाक चौबंद तैयारी की है.

फ़रवरी में बढ़ी हिेंसा को देखते हुए जहां कई जाट समुदायों सहित खाप पंचायत ने भी इस आंदोलन से ख़ुद को दूर रखा है.

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चूंकि आंदोलनकारियों ने 15 से अधिक गांवों में आंदोलन करने की धमकी दी है इसे देखते हुए सरकार ने अर्द्धसैनिक बलों की 55 कंपनियों को तैनात किया है. जिसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स मौजूद हैं.

राज्य के सभी पुलिसवालों की छुट्टियां रद्द कर दी गई है.

अर्द्धसैनिक बलों की कई टुकरियां अंबाला, जींद, रोहतक और हिसार में लगाई गई हैं.

जाटों ने आंदोलन की धमकी तब दी है जब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने जाट एवं अन्य समुदाय के लिए आरक्षण कोटा की अधिसूचना पर रोक लगा दी.

चंडीगढ़ से स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि जाट आंदोलन कर रहे समूह ऑल इंडिया जाट आरक्षण संघर्ष समिति का कहना है कि जाट आंदोलन खत्म होने के बाद सरकार को कुछ मांगे पूरी करनी थी.

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इसी साल फरवरी में जब जाट आंदोलन हुआ था तब 28 लोग मारे गए थे, जिनमें से 18 जाट थे. उनको मुआवजा देना था, उनके परिवार को सरकारी नौकरी देनी थी.

करीब 2100 लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज हुए थे उन्हें वापस लेना था. 300 के करीब लोग जेल में चले गए थे.

इन सब मांगो को पूरा न होते देख उनलोगों ने पांच जून को आंदोलन किए जाने की घोषणा कर दी थी.

इसी बीच हाई कोर्ट ने जाटों को दिए गए आरक्षण को रद्द कर दिया है. जिससे स्थिति को गंभीर बना दिया है.

सरकार ने जाट आंदोलन से जुड़े समूहों से अलग-अलग बात की है जिससे कि सारे लोग एक मंच पर न आ सके.

सुरक्षा के मद्देनजर मेट्रो, हाईवे, ट्रेन और मुनक कैनाल जिससे दिल्ली को पानी मिलता है इसकी सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं.

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वहीं पिछले आंदोलन में आंदोलनकारियों ने मुनक नहर को खोदने में जेसीबी मशीन का उपयोग किया था इसलिए सरकार ने जेसीबी मशीन तक पर रोक लगा दी गई है.

जाट आरक्षण का बड़ा कारण राजनीतिक भी माना जा रहा है. जाट और गैर जाट मामले में राजनीतिक पार्टियां बटी नज़र आती हैं. अलग-अलग पार्टी भी पूरे मामले को अलग-अलग तरीके से देखती है.

यहां तक की सत्ताधारी पार्टी भाजपा में भी जाट आरक्षण को लेकर मतभेद था और पिछली बार हुए आंदोलन में ही यह मतभेद खुलकर सामने आ गया था.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी की स्थानीय पत्रकार संजय शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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