12 साल की उम्र में कुरआन ए करीम हिफ़्ज़ मुकम्मल कर हाफिज ए कुरान बन गई, ये बच्ची

Jun 28, 2016

नई दिल्ली। रहमतों और बरकतों के महीनों में जामिया नगर के अबुल फज़ल में औरतों के लिए 20 दिन से चल रही तरवीेह की नमाज़ में क़ुरान मुकम्मल हो गया। माहरुख फ़ातिमा (ऐरम) जामिया मिल्लिया इस्लामिया की वह स्टूडेंट जो कि 12 साल की उम्र में कुरआन ए करीम हिफ़्ज़ मुकम्मल कर हाफिज ए कुरान बन गई। कुरआन सुनाते समय उनकी आवाज़ में वह खनक होती है, जो बहुत कम उलमा में पाई जाती है।

छोटी उम्र में वह बिना देख जब कुरआन की तिलावत करती है, तो सुनने वाले भी बड़े अदब और ख़ामोशी से इबादत में मशगूल हो जाते है। रमजान में लगातार पांच सालों से कुरआन (तरावीह) सुना रही है। बचपन से ही हाफिज बनने का इन्हें शौक था, सो पूरा भी हुआ। और यही वजह है कि मुस्लिम लड़किया आज हर क्षेत्र में ज़माने के साथ चलने में कहीं पीछे नहीं है। तभी तो दुनियावी तालीम के साथ-साथ दीनी तालीम में भी आगे बढ़ रही है।
18 साला हाफ़िज़ा माहरुख फ़ातिमा जामिया मिल्लिया इस्लामियाय से इसी साल 12 वीं में 80% नंबर से पास होने के बाद जामिया में ही ईटीई में अड्मिशन लिया है। हाफ़िज़ा ने कहा कि हम खुशनसीब है कि हमारे सीने में कुरआन है। हाफिज़े कुरआन बनने के बाद मुझे ज़िन्दगी का सबसे बड़ा तोहफा मिल गया। छोटी सी उम्र में यह मेरे लिए बड़ी ख़ुशी बात है।

ये भी पढ़ें :-  आखिर कौन होगा भारतीय टीम का उप-कप्तान इन खिलाड़ियों पर होगी नजरें

हाफ़िज़ा माहरुख इस कामयाबी को यू बयां करती है, जो कुरआन हज़ूर-ए-पाक पर नाज़िल हुवा हो उसे हमने मोकम्मल याद कर लिया है। इससे बड़ी ख़ुशी और क्या हो सकती है, कहती है की अल्लाह से दुआ करती हूं कि इस कुरआन-ए-मज़ीद को सभी लोगों तक पहुंचाए, हाफ़िज़ा होने का श्रेय अपनी अम्मी को देती है, जो कि इस दुनिया में नहीं रही। जर्नलिस्ट जौवाद हसन जो कि माहरुख के मामा है, उन्हों ने बताया की माहरुख कि अम्मी फ़हमीदा खातून की मौत 1 जून 2016 को दीन के काम (इस्तेमा) में शिरकत के लिए ई रिक्शा से अबुल फज़ल जा रही थी की, के 4 नंबर पर तेज़ रफ़्तार बायकर ने उनको जोरदार टक्कर मारी जिससे कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि 25 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस किसी को भी इस मामले में गिरफ्तार नहीं कर सकी है ? पांच भाई-बहन में माहरुख अपने माँ बाप की सब से बड़ी औलाद है, गौहर आदिल (ग़ाज़ी), सरवर आदिल (अमान), अनवर आदिल (लुकमान), नुदरत फ़ातिमा (सोनम)। माहरुख अपने अब्बू डॉक्टर आदिल अहमद, से लिपट कर रोते हुवे कहने लगी कि अम्मी के जाने के बाद अब समझ में नहीं आ रहा है कि पढ़ाई करु कि भाई बहन को देखू, कुछ देर बाद अपने-आप को संभालने के बाद कहती है कि अल्लाह बहुत बड़ा है।

ये भी पढ़ें :-  भाजपा में उपेक्षित हुए स्वामी प्रसाद मौर्य, कांग्रेस में जाने के जुगाड़ में लगे

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>
error: 24hindinews.com\'s content is copyright protected
error: 24hindinews.com\'s content is copyright protected