आपको जरूर जाननी चाहिए मोदी के भाषण की ये 10 खास बातें

Aug 15, 2016

नई दिल्ली: आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने जहां अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनवाईं, वहीं कई बातें ऐसी भी कही जो उनके भाषण में सबसे ज्यादा खास थीं। आइए जानते हैं उनके भाषण की 10 बड़ी बातें…

1- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिस तरह से , गिलगिट और पीओके के लोगों ने मुझे धन्यवाद दिया है, एक तरह से मेरे देश की सारी जनता को धन्यवाद दिया है। मैं उन लोगों के प्रति आभार प्रकट करता हूं।

2- पेशावर में स्कूल पर हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिस समय पेशावर में मासूम बच्चे मारे जा रहे थे, उस वक्त भारत की संसद रो रही थी। हमारा पूरा देश उन बच्चों के लिए आंसू बहा रहा था।

3- मोदी ने कहा कि भारत की सभ्यता हजारों साल पुरानी है। महाभारत के भीम से भीमराव अंबेडकर तक हमने एक लंबी यात्रा तय की है। आजादी के इस पावन पर्व पर नया संकल्प लेकर बलिदान देने वालों को याद करते हुए हम देश के लिए कुछ करने का संकल्प लें।

4- सिक्खों के 10वें गुरू, गुरू गोविंद सिंह ने कहा था कि जिन हाथों ने कभी किसी तरह की कोई सेवा नहीं की, मैं उन हाथों को कैसे पवित्र मान लूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं किसानों को उनकी कठिन मेहनत के लिए बधाई देना चाहता हूं।

5- मोदी ने कहा कि दिल्ली से महज 3 घंटे की दूरी पर हाथरस जिले में एक गांव है नर्दा पटेला। इस गांव तक दिल्ली से पहुंचने में केवल 3 घंटे लगते हैं लेकिन इस गांव में बिजली पहुंचने में 70 साल लग गए।

6- प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में बहुत सारी समस्याएं है, लेकिन उन समस्याओं का समाधान करने के लिए 125 करोड़ लोग भी हैं। चाहे पंचायत हो या संसद…ग्राम प्रधान हो या प्रधानमंत्री, सुराज्य का लक्ष्य हासिल करने के लिए हर किसी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

7- जातिवाद पर बोलते हुए मोदी ने कहा कि जो राष्ट्र जाति और धर्म के नाम पर बंटा हो, वो कभी बड़ी उपलब्धियां हासिल नहीं कर सकता। महात्मा गांधी, अंबेडकर जैसे महान नेताओं और रामानाजुनाचार्य जैसे संतों ने भी सामाजिक एकता पर बल दिया।

8- प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरे देश में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। सीमा पर आतंकवाद के नाम पर और जंगलों मे माओवाद के नाम पर हिंसा का खेल खेला जा रहा है।

9- प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें समाज में मौजूद बुराइयों से ऊपर उठना है, तभी हम भारत को एक सफल और मजूबत राष्ट्र बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि किस भी काम को टुकड़ों या हिस्सों में सोचकर नहीं करना चाहिए बल्कि एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

10- उन्होंने कहा कि बाद अब देश बदल चुका है। अब देश की जनता केवल योजनाओं की घोषणा से संतुष्ट नहीं होती, अब वह जमीन पर उन योजनाओं से जुड़े काम देखना चाहती है।

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