मुंबई में हुए तीन बम धमाकों में 10 दोषी, तीन बरी

Mar 29, 2016

मुंबई में 6 दिसंबर 2002 से 13 मार्च 2003 के बीच हुए तीन धमाकों के मामले में पोटा की विशेष अदालत ने मंगलवार को फैसला सुना दिया है.

इस फैसले में कोर्ट ने 13 आरोपियों में से 10 को दोषी ठहराया है और तीन को बरी कर दिया है. बुधवार को सजा का ऐलान किया जाएगा.

पकड़े गए अधिकतर आठ साल की सजा काट चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर हैं. मामले में 5 से ज्यादा आरोपी फरार हैं. जिनमें ताहेर और नूर मोहम्मद मलिक अंसारी ने पकड़े गए आरोपियों को बम बनाना सिखाया था.

पुलिस के मुताबिक तीनों धमाकों के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं क्योंकि धमाकों को अंजाम दिलाने में दो पाकिस्तानी आतंकियों का हाथ था जिनमें एक अबू अनवर अली पाकिस्तानी सेना से जुड़ा हुआ था.

गौरतलब है कि 6 दिसंबर 2002 को मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर धमाका हुआ था, जिसमें 22 लोग जख्मी हुए. राजधानी एक्सप्रेस छूटने के कुछ मिनट पहले धमाका हुआ था. दूसरा, धमाका 27 जनवरी 2003 में विले पार्ले रेलवे स्टेशन के बाहर सब्जी मार्केट में धमाका हुआ था. धमाके में कुल 30 लोग जख्मी हुए थे.

तीसरा धमाका 13 मार्च 2003 को मुलुंड ट्रेन में धमाका किया गया था. इसमें 10 की मौत हुई थी और 50 से अधिक जख्मी हुए थे. तीनों धमाके अलग-अलग हुए थे, लेकिन जांच में पता चला कि सिमी के एक ही मॉड्यूल ने तीनों धमाकों को अंजाम दिया है इसलिए सभी मामलों को एक साथ जोड़कर मुकदमा चला.

पोटा के तहत दर्ज उस मुक़दमे में कुल 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर मुकदमा चला. सिमी एक्टिविस्ट और पुराने कई मामलों से जुड़े साक़िब नाचन को धमाकों का मास्टर माइंड बताया गया.

इस मामले में आरोपी नंबर 10 आरिफ हुसैन सादिक हुसैन को अदालत ने डिस्चार्ज कर दिया. जबकि आरोपी नंबर 14 राशिद अहमद अब्दुल मलिक अंसारी और आरोपी नंबर 16 मोहम्मद सैयद सादिक तुराब अली की मौत हो गईय बाकी बचे 13 में से 12 जमानत पर हैं.

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