सपा का चुनाव चिह्न साइकिल चालाकी से रामगोपाल ने अलाट करा रखा है अपने नाम, अब अखिलेश के आएगा काम

Oct 24, 2016
सपा का चुनाव चिह्न साइकिल चालाकी से रामगोपाल ने अलाट करा रखा है अपने नाम, अब अखिलेश के आएगा काम
शिवपाल यादव की मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी हुई तो उन्होंने जानी दुश्मन रामगोपाल को भजपा का एजेंट बताते हुए पार्टी मुखिया मुलायम सिंह से निष्कासित करा दिया। अब पार्टी टूट की कगार पर है। एक तरफ अखिलेश यादव और प्रो. रामगोपाल यादव हैं तो दूसरी तरफ मुलायम सिंह और शिवपाल यादव एंड कंपनी। अखिलेश पार्टी तोड़ने का दाग अपने दामन पर लेने की बजाए चाचा शिवपाल के हर एक्शन पर रिएक्शन करने में ही जुटे हैं। शिवपाल भी पार्टी से बाहर जाने के मूड में नहीं हैं। वे सोचते हैं कि इससे वे पार्टी में विघटन के खलनायाक बन जाएंगे। अगर पार्टी टूटेगी तो चुनाव चिह्न को लेकर रार मचेगी। यूपी के सीनियर आईएएस सूर्यप्रताप सिंह का कहना है कि चुनाव चिह्न पार्टी महासचिव की हैसियत से रामगोपाल यादव ने अपने नाम आवंटित कराया है। इस नाते जहां रामगोपाल रहेंगे चुनाव चिन्ह पर उसी खेमे की दावेदारी ज्यादा मजबूत होगी।
चुनाव चिह्न पर रार मची तो मामला जाएगा चुनाव आयोग
अखिलेश ने जिस तरह से विधानमंडल दल की बैठक में विधायकों को जुटाकर शक्त प्रदर्श किया, उससे साफ हो गया है कि पार्टी के विधायक अखिलेश के साथ हैं। ऐसे में पार्टी सूत्र कह रहे हैं कि विवादों से परेशान होकर अखिलेश के पार्टी छोड़ने का सवाल नहीं रह। मगर जिस तरह से उनके सलाहकार चाचा प्रो. रामगोपाल के साथ मुलायम ने बर्खास्तगी का सलूक किया वह जरूर अखर रहा है। क्योंकि रामगोपाल मुख्यमंत्री पद से शिवपाल को दूर रखने के चक्कर में अखिलेश की शान में हमेशा कसीदे गढ़ते रहे। यहां तक कि 2012 के चुनाव में पार्टी को बहुमत मिलने के बाद शिवपाल की बजाए अखिलेख को सीएम बनाने का सुझाव भी रामगोपाल ने ही मुलायम को दिया था। क्योंकि रामगोपाल भलीभांति जानते हैं कि कि शिवपाल संगठन और सत्ता पर काबिज हुए तो उन्हें दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल फेकेंगे।
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