तेजस विमान को अगले साल तक लड़ाकू भूमिका में तैयार करने की योजना

Jul 06, 2016

भारतीय वायु सेना ने तेजस विमान को अगले साल तक लड़ाकू भूमिका में तैयार करने की योजना बनाई है.

इससे पहले जुलाई में स्वदेश निर्मित इन हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) का पहला दस्ता तैयार किया जाएगा. भारत इन विमानों को पाकिस्तान के जेएफ 17 लड़ाकू विमानों से उत्कृष्ट मानता है.

सरकारी स्वामित्व वाली एचएएल पहले दो तेजस विमानों को एक जुलाई को वायु सेना को सौंपेगी जो एलसीए का पहला दस्ता ‘फ्लाइंग डैगर्स 45’ होगा. यह दस्ता पहले दो साल के लिए बेंगलूर में तैनात रहेगा और उसके बाद तमिलनाडु के सुलुर स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

वायु सेना के सूत्रों ने कहा कि इस साल कुल छह विमान तैयार करने का और अगले साल करीब आठ और विमान तैयार करने का विचार है. तेजस अगले साल वायु सेना की योजना के तहत लड़ाकू भूमिका में दिखेगा और इसे अग्रिम ठिकानों पर भी तैनात किया जाएगा.

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सूत्रों ने कहा कि तेजस दुनिया में एकल इंजन वाला असाधारण विमान है.

उन्होंने कहा कि तेजस में पहले उजागर की गयीं 43 खामियों में से कम से कम 19 त्रुटियां अब भी हैं जो अधिकतर रख-रखाव और आसान परिचालन से संबंधित हैं.

जब पूछा गया कि पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित और निर्मित जेएफ-17 विमान की तुलना में तेजस कैसे आगे है तो वायु सेना ने कहा कि यह बेहतर है.

एक सूत्र ने कहा, ‘यह बेहतर है क्योंकि इसका अधिकांश निर्माण ऐसे मिशण्रसे हुआ है जो इसे हल्का और बहुत दक्ष बनाता है। इसके तीक्ष्ण गोला-बारूद और बम इसे सटीक तरीके से निशाना साधने में सक्षम बनाते हैं.’

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सूत्रों ने कहा कि तेजस विमान मिग-21 विमानों की जगह लेगा और इसे हवा से हवा में प्रहार और जमीनी हमले के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा और यह सुखोई 30 एमकेआई जैसे बड़े लड़ाकू विमानों के लिए भी सहायक हो सकता है.

योजना के अनुसार 20 विमान जहां ‘प्रारंभिक परिचालन मंजूरी’ के तहत शामिल किये जाएंगे, वहीं 20 विमानों को बाद में ‘दृश्य सीमा से परे मिसाइल’ (बीवीआर) और कुछ अन्य विशेषताओं के साथ शामिल किया जाएगा.

 

वायु सेना की बेहतर विशेषताओं के साथ करीब 80 विमानों को शामिल करने की योजना है, जिन्हें तेजस 1ए के नाम से जाना जाएगा.

तेजस का यह उन्नत संस्करण 275 करोड़ से 300 करोड़ रूपये के बीच की लागत का होगा.

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देश में ही लड़ाकू विमान बनाने की अवधारणा 1970 के दशक में रखी गयी थी, वहीं इस पर वास्तविक काम 80 के दशक में ही शुरू हो पाया और पहली उड़ान जनवरी 2001 में भरी गयी.

इस बीच सूत्रों ने कहा कि एलसीए को लेकर भारत की पहली महिला लड़ाकू पायलट उड़ान नहीं भरेंगी और शुरू में अनुभवी पायलट ही इन्हें उड़ाएंगे.

सूत्रों ने माना कि विमानों में बीच हवा में ईंधन डालने की क्षमता तेजस 1ए संस्करण में ही शामिल की जा सकेगी, जिसके 2019 में विकसित होने की उम्मीद है.
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